How to master English langauage (for Hindi speakers)?

हिंदी माध्यम से पढ़े बच्चों की समस्या ये होती है कि उन्हें जिंदगी में कभी न कभी अंग्रेजी से दो चार होना ही पड़ता है चाहे उच्च शिक्षा में हो या कार्यस्थल पर - ऐसे बहुत से लोग मुझे मेसेज भेजते हैं और पूछते हैं कि अंग्रेजी कैसे सीखे - अब क्योंकि मैंने खुद बीए तक हिंदी माध्यम से पढाई की थी, मुझे मालूम है कि हिंदी माध्यम वालों को उच्च शिक्षा में, खासतौर पर शोध छात्रों कोे, सिर्फ अंग्रेजी पर पकड़ न होने के कारण किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है - ऐसे लोगों को मैं अपने अनुभवों के आधार पर सलाह देता हूँ - कि भई, प्रतिदिन अंग्रेजी में पढो, लिखो, सुनो और बोलो - शुरुआत में भले ही पांच मिनट ही करो, लेकिन जो करो रोजाना करो - और साथ ही अपनी प्रगति को प्रतिदिन किसी डायरी, नोटबुक, विडियो इत्यादि के जरिये नोट करते रहो ताकि ये पता चलता रहे कि आप कहाँ से कहाँ पहुचे हैं - मेहनत का कुछ असर पड़ा है या नहीं - वो सब जो आपको एक भाषा सीखने के लिए चाहिए, आजकल तो आपके फ़ोन में ही मुफ्त में उपलब्ध है - रेडियो, गाने, मूवीज, उपन्यास, कहानियों की किताबें, अखबार, विडियो रिकॉर्डर, एमएस वर्ड, वाइस रिकॉर्डर, ब्रिटिश कौंसिल से लेकर बीबीसी तक के अंग्रेजी सिखाने वाले एप्प और वेबसाइट - कहीं लाइब्रेरी, कोचिंग, यूनिवर्सिटी जाने की जरुरत नहीं है - लेकिन अक्सर मैंने देखा है कि उन्हें ये सारी सलाहें पसंद नहीं आती हैं क्योंकि वे त्वरित समाधान की खोज में निकले हुए होते हैं - वो चाहते है कि मैं कोई ऐसा फार्मूला दूँ कि एक ही सप्ताह में अंग्रेजी भाषा पर उनकी पकड़ शशि थरूर जैसी हो जाए - अब ऐसा कोई फार्मूला तो है नहीं - भाषा पर पकड़ बनाने में समय और निरंतर प्रयास की जरुरत होती है - सीखना है, पकड़ बनानी है, तो आपको प्रयास हर दिन करना होगा, हर क्षण करना होगा और लम्बे समय तक करना होगा

Noida slums and illegal Bangladeshis

नोएडा में झुग्गी झोपड़ी उजड़ने के बाद मुल्ले कह रहे हैं कि सरकार को नोटिस देने चाहिए था। क्यों भई, क्यों दे सरकार नोटिस? क्या तुमने दिया था सरकार को नोटिस, झुग्गी बनाने से पहले? नही न। सुना है ये मुल्ले उसी झुग्गी में एक मस्जिद भी खड़ी कर रहे थे। सोचो अगर मस्जिद तैयार हो जाती तो झुग्गी साफ करना कितना मुश्किल होता। उत्तर प्रदेश सरकार समय रहते बांग्लादेशी झुग्गी का सफाया करने के लिए बधाई की पात्र है। मैं तो चाहूंगा सरकार अन्य शहरों में भी यही अभियान चलाये और बांग्लादेशियों का सफाया करे।

Your pick?

Your pick? 😊
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Islam: Allah is above all, he sits on a bench in the sky
Christianity: God is above all, he lives in the sky
Hinduism: Ishwar is within and everywhere.... ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । 
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Islam: Follow Islam and only then you will reach heaven, else you will be burnt in the fire of hell.
Christianity: Believe in the Christ and only then you will reach heaven, else you will be punished for eternity in hell.
Hinduism: Follow the path of Dharma (Righteousness) with love, and you will realize the absolute truth, that is beyond the petty concepts of heaven and hell.
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Islam: Non-Muslims are Kaafirs.
Christianity: Non-Christians are heathens.
Hinduism: Everyone is one, everyone is your own... The world is one big family, all are your people!
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Islam: There is no God but Allah. Mohammad is the messenger of Allah.
Christianity: Jesus was the only son of God.
Hinduism: Ishwar keeps manifesting himself. Whenever there is rise of evil and whenever there is decline of humanity, Ishwar manifests himself. To protect the righteous and to destroy the evil, Ishwar manifests, from one age to another ....
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम ।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥
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Islam: There is only one God : Allah .
Christianity: There is only one God: Yahweh
Hinduism: Ishwar is neither one nor many, He just is and his manifestations are infinite….
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Islam: Quran is the only book of truth.
Christianity: Bible is the only book of truth.
Hinduism: Truth is one, but the Rishis interpret in many ways…
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Islam: Mankind has lost its goal.
Christianity: Every human is a born sinner.
Hinduism: Every Atman (~soul) is divine…
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Islam: There is one life, one world, one Allah and only one moment of salvation.
Christianity: There is only one life, one world, one chance of salvation.
Hinduism: Life is infinite, universe is infinite, you have infinite chances to reach the absolute truth….

Hindu places captured by converted Muslims

नाम है अनंतनाग (हिन्दुस्तानी कश्मीर) - हिन्दू कितने, 1% भी नहीं
नाम है शारदा पीठ (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) - हिन्दू कितने, ०%
नाम है श्रीनगर ( हिन्दुस्तानी कश्मीर) - हिन्दू कितने, २%
नाम है कन्याकुमारी (तमिलनाडु) - हिन्दू कितने, <५०%
सोचो, ये सारे भूभाग कभी हिन्दू बहुल हुआ करते थे - आज ये अब्राह्मिक अनुयायियों के कब्जे में हैं - इन जगहों पर न तुम अपने त्यौहार मना सकते हो, न ही वहाँ स्थापित मंदिरों में जाकर पूजा कर सकते हो, शारदा पीठ पाकिस्तान में तुम कदम भी नहीं रख सकते हों, पूजा करने की तो बात ही छोड़ दो. ये जो मंदिर नीचे फोटो में देख रहे हो - मार्तंड सूर्य मंदिर नाम है इसका - अनंतनाग, कश्मीर में है - सिकंदर बुतशिकन (यानि मूर्तियाँ तोड़ने वाला) ने इसे और ऐसे हो सैकड़ों मंदिरों को तोडा था - फारसी इतिहासकार फ़रिश्ता कहता है कि कश्मीर में हिन्दुओं के मंदिरों को ध्वस्त करने, जलाने और विकृत करने का उपक्रम लगभग एक साल तक लगातार चला था - सेक्युलर इतिहास जो हमें स्कूलों, कालेजो में पढाया जाता है उसमें से ये सब गायब है



Martand Hindu Sun Temple, Anantnag, Kashmir

Kashmir, Kashmiriyat, and Rajnath Singh

लोग राजनाथ सिंह पर भड़के हुए हैं कि वो भड़काऊ बयान क्यों नही दे रहे हैं। केवल निंदा ही क्यों किये जा रहे हैं। तो ऐसा है यदि आप उनकी जगह होते तो आप भी यही करते। देश में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की जिम्मेवारी उनके कंधो पर है। वो कोई भी ऐसा बयान नही देना चाहते जिससे मीडिया मुल्लों को और भड़काए और कश्मीर की आग देश अंदरूनी हिस्सो में भड़के। और रही बात आतंकवादियों के खिलाफ़ कार्यवाही की, तो उन्हें मालूम है कि उन्हें क्या और कैसे करना है। अपनी हर स्ट्रेटेजी को मीडिया के जरिये आप तक नही न पहुचायेंगे। फेसबुक और ट्विटर पर कीबोर्ड योद्धाओं के लिए ये कहना तो आसान है कि आतंकवादियों को मार दो फांसी चढ़ा दो, पर क्या ये काम इतना आसान है। मान लो अगर गृहमंत्री बोल भी दे मीडिया में कि हम आतंकवादियों को निस्तेनाबूत कर देंगे, कश्मीरियों को सबक सिखा देंगे, तो क्या ऐसा कहने से कुछ बदल जायेगा, इस्लामिक आतंकवादी डर जायेंगे। फेसबुक और ट्विटर पर हम अपने घर की सुरक्षा में बैठकर कुछ भी बकवास कर सकते हैं। कभी कभी मैं भी करता हूँ। गुस्सा आता है तो मैं भी अनाप शनाप लिखता हूँ। पर हम आप जो सोचते हैं खासतौर कश्मीर के बारे में, उसको कार्यान्वित कर पाना इतना आसान नही है, इसके लिए चाचा नेहरू को धन्यवाद करना चाहिए। राजनाथ सिंह को मालूम है कि उन्हें एक गृहमंत्री के तौर पर किस प्रकार की संयमित भाषा इस्तेमाल करनी चाहिए। बड़े बोल बहुत सी बातों को बिगाड़ देते हैं। इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ काम जमीन पर दिखना चाहिए, ट्विटर और फेसबुक पर नही। ठीक वैसे ही जैसे मिशनरीज़ का काम जमीन पर दिखता है फेसबुक ट्विटर पर नही। गृहमंत्री का काम लोगों को भड़काना नही है, शांति और सौहार्द्र बनाये रखना है। सेना अपना काम करेगी। बड़े बोल बोलकर कर कुछ हासिल नही होता है।

Tired of hypocrisy

एक समय था जब फेमिनिज्म, सेकुलरिज्म, ह्यूमन राइट्स, मर्क्सिस्म मेरे पसंदीदा टॉपिक हुआ करते थे - लेकिन आज ये शब्द सुनते या देखते ही एक अजीब सी घृणा होती है

Islamists in Indian subcontinent

कश्मीरी पंडितों को सेकुलरिज्म के कीड़े ने काटा हुआ था - मुल्लों ने उन्हें कश्मीर से मार भगाया - कश्मीर पर कब्जा कर लिया। केरल में भी हिंदुओं को सेकुलरिज्म के कीड़े ने जबरदस्त काटा हुआ है - मुश्किल से 50-55% बचे हैं। बंगालियों को तो सेकुलरिज्म के कीड़े ने बहुत पहले ही काट लिया था - परिणाम देखिये - मुल्लों ने पहले बांग्लादेश लिया - अब बचा खुचा बंगाल भी छीन रहे हैं। 712 के बाद से अब तक 1300 साल से ज्यादा हो चुके हैं पर हिंदुओं को ये समझ नहीं आया कि अब्राहमिक रिलिजन विस्तारवादी है, उनको अपने रिलिजन के विस्तार के लिए तुम्हारी गर्दन भी काटनी पड़ेगी तो वो काटेंगे। दारुल हर्ब को दारुल इस्लाम बनाना उनका लक्ष्य है। ईसाईयत फैलाना उनका कर्तव्य है - चाहे फिर उन्हें फेक मिरकल्स करने पड़े या फिर चावल और दवाइयों की टोकरी देकर तुम्हारा नाम मैकू से माइकल करना पड़े या फिर झूठ बोलना पड़े। उन्हें मानवता से कोई लेना देना नही है - जीसस और अल्लाह जैसे इमेजिनरी कैरेक्टर्स के नाम लेकर, मानवता का नाम लेकर वो तुम्हे बेवकूफ बनाते है और तुम बनते हो - पहले हमले के 1305 साल बाद भी हिंदुओं (सिखों, जैनियों, बौद्धों) को अक्ल नहीं आयी है। पहले अफ़ग़ानिस्तान खोया, फिर सिंध खोया, पंजाब खोया, बलोचिस्तान खोया, बंगाल खोया। हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर भी मुल्लों के हांथों में जाने वाला था पर पटेल ने बचा लिया। कश्मीर फिर भी हाँथ से फिसल गया, मुल्लों ने कब्जा कर लिया, कश्मीरी पंडितों को मार भगाया, उनकी औरतों को बलात्कार किया, घरों को जला दिया, जमीने हड़प ली, दुकाने लूट ली। फिर भी कश्मीरी पंडितों में खास तौर पढ़े लिखे लोगों में सेकुलरिज्म के कीड़े ने अभी तक जबरदस्त पैठ बना रखी है। आज भी टीवी पर अखबार में कश्मीरी मुल्लों के गुणगान करते नज़र आते हैं। बंगालियों का भी यही हाल है - बहुत से बंगाली अभी भी सेकुलरिज्म के नशे में हैं - मुल्लों का बचाव किये जा रहे हैं - चार दिन बाद इन्हें भी कश्मीरी पंडितों की तरह मार कर जब मुल्ले वहां से भगाएंगे, हो सकता है तब नशा उतरे। हो सकता है तब भी न उतरे, क्योंकि सेकुलरिज्म का कीड़ा हिंदुओं में जिसे एक बार काट लेता फिर वो जिंदगी भर उससे पीड़ित रहता है।