दुर्गापूजा का मौसम चल रहा है


दुर्गापूजा का मौसम चल रहा है - लेफ्टिस्ट कम्युनिस्ट होने का दम भरने वाली लड़कियां, चाहे वो जेएनयू से हो या जादवपुर से या विश्वभारती से, जो सालभर तथाकथित 'दलित' महिषासुर के गुण गाती है, महिषासुर दिवस मनाती है, दुर्गा को वेश्या कहती है, उनका सजने-संवरने और दुर्गा पूजा पंडाल में सेल्फी लेने का टाइम आ गया है - एक सहेली दूसरे सहेला को दुर्गा पूजा की बधाइयाँ दे रही है - बढ़िया महँगी साडी में लिपट, बड़ी बिंदी लगा, महंगे फ़ोन से सेल्फी खीचकर फेसबुक पर पोस्ट डाल रही है - ऐसे लोगों को hypocrite न कहा जाए तो क्या कहा जाये|

आजकल बड़ी चर्चा है तारिक फतह की


आजकल बड़ी चर्चा है तारिक फतह की - सब यही सवाल पूछ रहे हैं कि तारिक इंडिया की इतनी तारीफ करते है, कहीं तारिक फतह को भारत की नागरिकता तो नहीं चाहिए? जिस व्यक्ति को कनाडा जैसे विकसित देश की नागरिकता मिली हुई हो, जहाँ स्वास्थ्य सेवाएं फ्री हैं, शहरों में प्रदूषण जीरो है, सड़कें, गलियां साफ़सुथरी चमचमाती है, आराम और सुकून की जिंदगी जीने की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, साफ़ पानी उपलब्ध है, बिजली गैस २४x७ है, पुलिस जालिम नही है, छोटे छोटे कामों के लिए रिश्वत नही देनी पड़ती है, खाने में मिलावट नही होती है - ऐसे देश का नागरिक हिंदुस्तान की नागरिकता क्यूँ लेना चाहेगा जहाँ शहरों में न शुद्ध पानी मिलता है, न खाना, शुद्ध हवा की तो बात ही छोड़ दीजिये, जहाँ हर मोड़ पर रिश्वत देनी पड़ती हो, सरकारी अफसर, पुलिस हर आमजन को ऐसे ट्रीट करता हो जैसे वही पाकिस्तानी आतंकवादी या बंगलादेशी इललीगल माइग्रेंट हो, जहाँ रेस्टोरेंट में कल का खाना गर्म कर आज परोस देते हो, लोग ट्रैफिक के नियम न फॉलो करते हो, हॉर्न बजाकर कान फाड़ देंते हों और तो और जिस देश का परकैपिटा जीडीपी पाकिस्तान के बराबर हो, ऐसे देश की नागरिकता बुढ़ापे में तारिक फतह लेकर क्या करेंगे? १०-1५ साल बचें है जिंदगी में वो सूकून से टोरंटो में गुजारेंगे या तुम्हारे प्रदूषित दिल्ली या जल संकट से जूझ रहे चेन्नई या बंगलोर में गुजारेंगे |