Orthodox High Caste Hindus

आजकल इन्टरनेट पर होने वाली चर्चाओं में हिंदुओं में एक नया वर्ग तेजी से उभर कर आ रहा है - ऑर्थोडॉक्स ब्राह्मणों का। ये पढ़ा लिखा वर्ग है और इंटरनेट पर इसकी खास पकड़ बन गयी है। इस वर्ग का ये मानना है कि आम हिन्दू की जिन्दगी कैसी होनी चाहिए, क्या सही है, क्या गलत है, ये पुरातनपंथी रूढ़िवादी ग्रन्थ निर्धारित करेंगे। अगर कोई उनके unintelligible ग्रंथों की illogical रीजनिंग को स्वीकार न करे तो वो हिन्दू नहीं है। ये जातिवादी ब्राह्मण ये प्रचारित करने में लगे हैं कि कुछ विशेष मंदिरों में महिलाओं के अंदर जाने पर कोर्ट का प्रतिबन्ध शास्त्र सम्मत है, जाति विभेद हिंदुओं के लिए अच्छा है, इसे बनाये रखना चाहिए, इत्यादि। ऐसे पण्डे हिन्दू समाज को फिर से अन्धकार युग में धकेल देना चाहते हैं। इसलिए जहाँ मौका मिले इनका विरोध करो।

Kashmir Valley: Heaven or Hell?

लोगों को #कश्मीर पर बड़ा प्यार आता है। तारीफ करते नहीं थकते। कोई कहता है स्वर्ग है, तो कोई कुछ और। मुझे पता नहीं क्यों कश्मीर वैली से खास नफरत है। कोई फ्री का वेकेशन पैकेज भी दे तो भी मैं #मुल्लों द्वारा कब्जाई उस जमीन पर पैर न रखूँ। वैसे भी आप कश्मीर वैली की तस्वीरों से देखकर ही पता लगा सकते हैं कि कश्मीर सिर्फ उन्ही के लिए खूबसूरत है जिन्होंने दुनिया के और हिस्से नहीं देखे। दुनिया में कश्मीर वैली से कहीं ज्यादा खूबसूरत और बहुत सी जगहें है। मेरे हिसाब से जब तक मुल्ले हैं कश्मीर वैली में, वो धरती का #नर्क है और रहेगा।

Go get a room, don't do it in public.

आजकल लखनऊ एयरपोर्ट पर पूजा करते हुए एक पंडित जी की फोटो फेसबुक बहुत घूम रही है। फ़ेसबुकिया हिन्दू शेर बहुत खुश हो रहे हैं और कह रहे हैं पहली बार किसी हिन्दू को बेझिझक सार्वजानिक स्थान पर पूजा करते देखा। जबकि यही लोग फ्लाइट में मुसलमानों के नमाज़ पढते दिखाने वाली फोटो पर आपत्ति जताते हैं। इस मुद्दे पर मेरा मानना है कि सार्वजानिक स्थानों पर, रास्तों पर, सडकों पर पूजा पाठ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ये नियम सभी धर्मों और पंथों पर लागू होना चाहिए। मुल्ले हो या पण्डे या नव बुद्धिस्ट या सिख किसी को भी पब्लिक प्लेस में घेर कर पूजा पाठ नमाज अरदास इत्यादि की बिल्कुल भी छूट नहीं होनी चाहिए। एयरपोर्ट इत्यादि पर सर्वधर्म प्रार्थना का एक रूम होना चाहिए उसी में खूब करो जितनी नमाज़ पढ़नी हैं या पूजा करनी है। सार्वजानिक स्थानों पर रास्ता मत घेरो और नमाज़ पढ़ने के लिए अपनी चटाई मत बिछाओ। अपने इमेजिनरी फ्रेंड से बात करनी है तो घर पर करो या अपने पूजा स्थल पर करो। जैसे अंतरंग सम्बन्ध सार्वजानिक स्थान में नहीं बनाये जाते वैसे ही पूजा पाठ नमाज एकांत में ही अच्छे लगते हैं। Go get a room, don't do it in public.

पेटा (PETA) इंडिया का दोगलापन

पेटा दुनिया भर में जानवरों को एथिकल ट्रीटमेंट की बात करती है। जानवरों के क़त्ल को रोकने के लिए काम करती है। हर जगह आवाज बुलंद करती है सिवाय कुछ जगहों पर छोड़ कर।  वो कौन से ऐसे मौके हैं जब पेटा जानवरों के मुद्दे पर शांत रहना पसंद करती है? पेटा कभी भी इस्लाम या इस्लामिक देशों में हो रहे जानवरों पर अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाता है। इस्लाम में कई ऐसे त्यौहार हैं जब लाखों करोड़ों की तादाद में जानवर काटे जाते हैं पर पेटा के ऑफिस से कोई अपील नहीं आती जो इस खून खराबे को बंद करने के लिए अपील करे। दूसरी तरफ जहाँ पर पेटा को लगता है कि विरोधी शांतप्रिय है और उनके खिलाफ अभियान चलाने में उसका और उसके वालंटियर्स का कुछ नहीं बिगड़ेगा, वो पूरे तामझाम के साथ प्रोट्रस्ट करने लग जाते हैं। ऐसा ही कुछ भारत में हुआ। दक्षिण भारतीय हिंदुओं की सांस्कृतिक धरोहर बुल रेसिंग पर पेटा ने अपना अभियान शुरू किया और बात को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए और जल्लीकट्टू पर कानूनी रोक लगवा दी। पर पेटा की ये हिम्मत नहीं है कि बकरीद जो कि मुसलमानों का त्यौहार है के दौरान करोड़ों जानवरों के क़त्ल पर कोर्ट जाकर पर रोक लगवा दें। क्योंकि पेटा को मालूम है मुस्लमान न केवल उनके वालंटियर्स को जान से मार देंगे बल्कि पेटा को अपना ऑफिस बंद कर अपने देश लौटना पडेगा।
अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार आने के बाद गैर कानूनी स्लॉटर हाउसेस को सरकार ने बंद करवा दिया, पर अभी तक पेटा की इस  पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है - न ख़ुशी की, न दुःख की। कारण जानते हैं? क्योंकि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री हिन्दू है और बीजेपी हिंदुओं की तरफ झुकाव रखने वाली पार्टी है। पेटा इंडिया में बैठे लोग सिर्फ हिंदुओं से नफरत करते है, परंतु इस्लाम के खिलाफ बोलने में उनको डर लगता है। नेपाल में हिंदुओं के पर्वो के दौरान पशुओं के क़त्ल को तो पेटा अंतर्राष्ट्रीय स्तर जोर शोर से उठाती है, पर बकरीद पर होते खून खराबे पर ये चुप रहते हैं। पेटा की इसी हिपोक्रिसी की वजह से मैं अब इस संस्था को बिलकुल पसंद नहीं करता।

इंटरव्यू की तैयारी कैसे करें: कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदु


यदि आप पहली बार किसी इंटरव्यू में भाग लेने जा रहे हैं तो जाहिर है आप थोड़ा नर्वस तो होंगे ही। लेकिन किसी इंटरव्यू में सफल होना कोई बड़ी बात नहीं है अगर आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें

पूर्व तैयारी - किसी भी इंटरव्यू में जाने से पहले आपको कई प्रकार की तैयारियां करनी पड़ती हैं - अपने अब तक के करियर या शिक्षा के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।  अगर आपको शक हो कि आप अपने पूर्व करियर का अच्छे से वर्णन नहीं कर पर रहे हैं तो आपको उसकी तैयारी कर लेनी चाहिए। अपने पूर्व करियर के बारे में कभी नेगेटिव न सोचे भले ही आप ने किसी छोटी कंपनी में नौकरी की हो या खेती किसानी की हो - साक्षात्कार में हमेशा अपने कार्यों को एक सकारात्मक नज़रिये से प्रस्तुत करें और इस तरीके से प्रस्तुत करें जिससे साक्षातकर्ताओं को मालूम पड़े कि आपने अपनी जॉब में कई महत्वपूर्ण चीजे सीखी है जो आपकी स्किल्स को अच्छा करने में सहायक साबित हुई हैं।

इंटरव्यू में आपकी ड्रेस महत्वपूर्ण होती  हैं - शिक्षा या कॉर्पोरेट क्षेत्र में साक्षात्कार देने जाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें - आपकी ड्रेस ज्यादा चमकीली और कसावदार नहीं होनी चाहिए  और न ही बहुत ढीली। लड़के अपने बालों को छोटा और कंघी किया हुआ रखें। बीच से मांग निकालने से बचें। यदि आपको टाई नहीं पसंद है, या उसमे सहज महसूस नहीं करते हैं तो मत लगाएं। बेल्ट सिंपल होनी चाहिए। चमड़े के काले जूते पहनने चाहिए - अगर आपको इस प्रकार के फॉर्मल ड्रेस पहनने की आदत नहीं है तो आप एक दो महीने पहले से इन्हें पहनने की आदत डालिये। नाखून कटे हुए होने चाहिए और क्लीन शेव करके जाना चाहिए। अगर क्लीनशेव की आदत नहीं तो कई महीने पहले से इसकी आदत डालें।

इंटरव्यू में जाने से पहले कभी ये न सोचे कि आपका सिलेक्शन नहीं हो पायेगा या हो पायेगा।  इंटरव्यू को एक चैलेंज के तौर पर लें और हमेशा नेचुरल एंड पॉजिटिव रिस्पांस दें। एक सवाल जो अक्सर पुछा जाता है कि आप अगर टीम में काम कर रहे हैं और आपका एक साथी बहुत ही आलसी है तो आप उससे कैसे निपटेंगे। ऐसे सवाल काफी चैलेंजिंग होते हैं। जाहिर है कि कोई भी इंटरव्यू लेने वाला ऐसा कर्मचारी नहीं लेना चाहेगा जो ये जवाब दे कि मैं उस अलसी साथी को वार्निंग देकर निकाल दूंगा और किसी दूसरे व्यक्ति को चुनुंगा। आपका जवाब ये होना चाहये कि मैं उससे बात करूँगा और उसकी परेशानी समझने की कोशिश करूँगा - हो सकता है कि उसे कोई शारीरिक या मानसिक या पारिवारिक या किसी और तरीके को समस्या हो जिसकी वजह से वह अपना पूरा ध्यान काम में न लगा पाता हो - मैं उसकी समस्याओं को जानकार उसकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करूँगा और उसे काम में मन लगाने के लिए उत्साहित करूँगा।

कभी भी अपने आपको ऐसा दिखाने की कोशिश न करें जो आप हैं नहीं।  आप में काफी कमिया भी होंगी जिन्हें आपको जब पूछा जाय तो बताना चाहिए पर ये धयान रखना चाहिए कि कमियों को कुछ इस प्रकार से बताएं कि वो कमिया भी आपकी पॉजिटिव पॉइंट लगें। जैसे भावुक होना एक कमी हो सकती हैं पर भावुक होना कभी कभी आपको दूसरे की समस्याएं समझने में मदद भी करता है - यही चीज आपको इंटरव्यू लेने वालो को कहानी है कि मैं भावुक तो हूँ पर कभी कभी अपने साथियों की परेशानियों को समझने में और सहारा देने में यह कमी एक पॉजिटिव पॉइंट बन जाती हैं।



हिन्दू और शिरडी बाबा

अब से कोई शिरडी वाले साईं बाबा की तस्वीर शेयर करते दिख गया तो वही ब्लॉक कर दिया जायेगा। क्या हिन्दुओं में देवी देवताओं की कमी है जो बाबाओं, ढोंगियों, मुल्लों, मौलवियों इत्यादि की फोटो शेयर किए जा रहे हो? कुछ लोगों के पूजा घरों तक भी साईं बाबा पहुँच गए हैं - लोगों ने उस आदमी को पूजाघर में शिव, पार्वती, गणेश, हनुमान के बीच बिठा दिया है। कुछ हिन्दू तो शिरडी की बाकायदा यात्रा करके लाखों का चढ़ावा चढ़ाकर आते हैं बिना ये जाने कि वो चढ़ावा कहाँ जाता है किस काम में लगता है। ये हिन्दू जिसकी देखो उसी की पूजा करने लग जाते हैं। कोई ईसाई मिशनरी अगर जीसस की फोटो यह कहकर थाम जाये कि जीसस बिगड़े हुए सारे काम बना देते हैं तो झटपट इस प्रकार के हिन्दू जीसस उस फोटो को अपने पूजाघर में रखकर उस पर रोज अगरबत्ती जलाने लग जाते हैं। दुनिया में इतनी मूर्ख कोई और कौम नहीं देखी आजतक मैंने, सच में।

मंदिर को स्वतंत्र करना ही पड़ेगा।

मुस्लिम आक्रांताओं ने गुजरात में सोमनाथ तोड़ा और लूटा, कश्मीर में मार्तण्ड सूर्य मंदिर तोड़ा, काशी में विश्वनाथ मंदिर तोड़ ज्ञानवापी मस्जिद बनाई, मथुरा में कृष्णजन्मभूमि मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई, अयोध्या में रामजन्मभूमि में मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई, 27 मंदिरों को तोड़ क़ुतुब काम्प्लेक्स में कुव्वतुलइस्लाम मस्जिद बनाई। ये तो बस कुछ उदाहरण दिए हैं ऐसे हज़ारों मस्जिदें हैं जो मंदिरों को तोड़ कर बनाई गयी हैं। क्या भारत के मुसलमानों का यह नैतिक दायित्व नहीं बनता कि वे मंदिरों की जमीन को मस्जिदों से स्वतंत्र करें? क्या कभी मुसलमान इस बात को स्वीकार सकता है कि सऊदी अरब में मुहम्मद के जन्मस्थान से सटकर एक शिवमंदिर बना दिया जाये? यदि नहीं तो काशी मथुरा और अयोध्या में मंदिरों से सटी हुई मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा बनाई मस्जिदों को हिन्दू कैसे स्वीकार सकते हैं? मंदिर को स्वतंत्र करना ही पड़ेगा।

रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इन्हें टूटने से बचाएँ। पैसे के घमंड में आकर रिश्ते न तोड़े।

अपने जीवन में आप एक गाँठ बाँध लें कि आप अपने जानने पहचानने वालों, रिश्तेदारों इत्यादि को कभी भी किसी भी तरीके से अपमानित न करें क्योंकि आपकी वो बात जो आपको छोटी लगती है किसी के दिल में ऐसा घाव कर जाती है जो जिंदगी भर नहीं भर पाता है। मैंने बहुत बार देखा है कि हम अपने से छोटे लोगों को डाँट देते हैं, उन्हें भला  बुरा बोल देते हैं, कभी कभी तो लोग अपने से उम्र में छोटे लोगों को गालियाँ तक दे देते हैं। ऐसा करना से रिश्ते बिखर जाते हैं। उम्र में छोटा व्यक्ति भले ही आपका लिहाज करने की वजह से आपकी गलियों का जावब गाली से न दे परंतु वह उन गलियों से उत्पन्न घाव को जिंदगी भर याद रखता हैं। आपको लगता है कि आज आपके पास पैसा है और उम्र में छोटे भाई या बहन की सहायता कर आप उस पर अहसान कर रहे हैं तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है और इसकी वजह से आपको अपने भाई या बहन को अपमानजनक शब्द कहने का लाइसेंस मिल जाता है तो आप गलत हैं।  हमारे समाज में बड़े होने का मतलब अक्सर ये लगाया जाता हैं कि उनके अपने से उम्र में छोटो को कुछ भी कहने का अधिकार है। ऐसा नहीं है। आप चाहे जितने ही बड़े क्यों न हो, चाहे जितने ही पैसे वाले क्यों, आपने चाहे जितनी ही अपने भाई बहन की सहायता क्यों न की हो, आपको उनकी बेइज्जती करने का अधिकार नहीं है। रिश्ता कोई भी हो, चाहे माँ ही क्यों न हो अपने बच्चे को जलील, अपमानित करने का अधिकार उसे भी नहीं है। और अगर बड़े अपने से छोटों को जलील करते हैं तो ये याद रखिये कि छोटे उस बाद को कभी भी नहीं भूलते हैं - वह बात उनके दिल में रहती है - जिंदगी में जब कभी समय बदलेगा, उसके भी अच्छे दिन आएंगे, तब हो सकता है वह अपनी बेइज्जती का बदला आपकी बेइज्जती करके ले। इसलिए अगर आप किसी की किसी भी तरह की सहायता करते भी हैं, तो ये मत सोचे कि दूसरा व्यक्ति आपका गुलाम हो गया है, आप उसे कैसे भी ट्रीट कर सकते हैं, आप उसे गली दे सकते हैं उसकी बेइज्जती कर सकते हैं।  नहीं आप नहीं कर सकते ऐसा कुछ।  और ऐसा करते भी है तो भविष्य में अपने साथ भी वैसा ही व्यवहार होगा इसके लिए तैयार रहे। रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इन्हें टूटने से बचाएँ। पैसे के घमंड में आकर रिश्ते न तोड़े। 

वामपंथी चिंतित है कि एक के बाद एक दक्षिणपंथी हर देश में सत्ता पर काबिज होते जा रहे हैं।

दुनिया भर में वामपंथी चिंतित है कि एक के बाद एक दक्षिणपंथी हर देश में सत्ता पर काबिज होते जा रहे हैं। वे इसका दोष दक्षिणपंथियों पर मढ़ देते हैं, पता नहीं क्यों? अगर आप ध्यान से देखें तो दक्षिणपंथियों के सत्ता में आने का मुख्य कारण वामपंथ और उनके साथियों (भारत में सेकुलरिज्म के स्वघोषित झंडाबरदार कांग्रेस और उनके साथी) का अर्थव्यवस्था सहित हर मोर्चे पर विफल होने रहा है। आज तुष्टीकरण, hypocrisy वाम के रग रग में बसी है चाहे भारत हो या कनाडा या फिर फ्रांस या अमरीका। दुनिया में कहीं भी जाइये लाल रंग हरे रंग के मानवता के प्रति किये गए अपराधों पर मानवाधिकारों का पर्दा डालता हुआ मिलेगा इसके बावजूद कि जब भी हरा रंग बहुमत में होता है तो लाल रंग को मौत के घाट उतार देता है। हरे रंग वाले 52 देशों में लाल रंग का नामोनिशान नहीं है और अगर है भी तो काला हो गया होगा। लाल रंग को आत्ममंथन की जरुरत है, न कि दक्षिणपंथ पर आये दिन झूठे आरोप लगाने की और जनता के बहुमत द्वारा चुनी गयी सरकारों के खिलाफ आये दिन धरना देने की। ऐ, लाल झंडा ऊँचा करने वालों, तुम जितने बेबुनियाद आरोप लगाओगे, धरने दोगे, दक्षिणपंथ की सियासी उम्र उतनी ही बढ़ती चली जायेगी। संभल जाओ, तुम्हे मालूम है न, कि लाल रंग का वजूद हरे रंग में आकर मिट कर काला हो जाता है, काला रंग यानी अँधेरे का प्रतीक। क्यों हरे रंग के चक्कर में अपने और इस मानवता को अँधेरे में धकेल रहे हो? जागो, तुम तो समाज को प्रगतिशील और समतामूलक बनाना चाहते हो न, उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करो, न कि धरने और अरोपबाजी। हरे रंग के प्रति अगाध प्रेम से तुम्हे कुछ नहीं मिलेगा, कालिख के सिवाय। जागो अगर चाहते हो कि मानवता का भविष्य कहीं अंधकारमय न हो जाये तो।

जब कोई सलाह मांगे, सलाह दीजिये, भूल जाइए और खुश रहिये।

एक कहावत है सुनो सब की, करो मन की। कहावत तो अपने देश की ही है पर इस कहावत को हम अक्सर अपनी जिंदगी में इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, उतार नहीं पाते है। क्यों? क्योंकि अगर आप अपने मन की करने लगते हैं तो आपसे उम्र में बड़े लोग जिनसे आपने सलाह ली है वो नाराज़ हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि आप उनकी अवमानना कर रहे हैं, उनका अनादर कर रहे हैं। वो इस बात से परेशान रहते हैं कि आपने उनकी सलाह/बात नहीं मानी। उन्हें लगता हैं कि वो बड़े है इसलिए उनकी सलाह आपको माननी ही चाहिए। बजाय ये समझने के कि आप उनकी सलाह पर अमल क्यों नहीं किया, ज्यादातर लोग आप के सलाह न मानने को अपनी बेइज्जती/इंसल्ट के तौर पर ले लेते हैं। वो मुंह फुलाकर बैठ जाते हैं, आपसे बात नहीं करते हैं।
मुझे लगता है कि अगर किसी ने सलाह मांगी चाहे वह छोटा हो बड़ा, आपका काम है सलाह देना, न कि ये आशा रखना कि आपकी सलाह ही उसके लिए सर्वश्रेष्ठ है और उसे उस पर अमल करना ही चाहिए। हमेशा याद रखिए कि किसी व्यस्क को बिना मांगे सलाह देने की आदत अच्छी नहीं होती है। अक्सर आप सलाह बिना मांगे सलाह देते हैं क्योंकि आपको लगता है आप उसके शुभ चिंतक है, पर जरुरी नहीं जिसे आप अपनी सलाह दे रहे हैं वो भी सोचता हो कि आपके उसके शुभ चिंतक हैं। आपको लगने से कुछ नहीं होता है। अगर सलाह देनी है तो उस व्यक्ति के साथ अपना कम्युनिकेशन मज़बूत करें और उसके विश्वस्त बनें।
अगर कभी आप अपने मित्रों, भाइयों, बहनों, बेटे, बेटियों को भी बिना सलाह बिना मांगे देते हैं तो भी आपका का कोई अधिकार नहीं बनता कि आप उस व्यक्ति पर ये दबाव डालें कि वो आपकी सलाह माने ही या ये आशा रखें कि वो आपकी सलाह मानेगा ही। हर व्यस्क व्यक्ति अपने जीवन के निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उसको आप मुताबिक नहीं चला सकते हैं। सलाह देनी है दे दीजिए फिर आप काम में जुट जाइये। वो सलाह माने या माने, उसकी मर्जी। अगर आपकी सलाह नहीं मानी जाती है तो आपको दुखी नहीं होना चाहिए। क्यों दूसरों के एक्शन्स को लेकर अपनी जिंदगी के दुःख बढ़ाने? क्या आपकी अपनी जिन्दगी के दुःख जूझने के लिए कम हैं? आपको उस व्यक्ति पर नाराज़ भी नहीं होना चाहिए। उसकी अपनी स्वतंत्रता है। आपको बेइज्जत भी नहीं महसूस करना चाहिए।
बस जब कोई सलाह मांगे, सलाह दीजिये, भूल जाइए और खुश रहिये।

क्या उत्तर प्रदेश में बीजेपी का बहुमत प्रदेश की स्थिति में सुधार ला पायेगा?

उत्तर प्रदेश में चुनाव के रिजल्ट्स आने के बाद से अब तक कई दिन बीत चुके हैं पर भारतीय जनता पार्टी अभी तक अपने मुख्यमंत्री को नहीं चुन पायी है।  मुख्यमंत्री के पद के लिए कई चेहरे चर्चा में है पर मेरे विचार से उत्तर प्रदेश बीजेपी में कोई भी ऐसा चेहरा नहीं है जिसके पास प्रदेश के भविष्य को लेकर कोई विज़न हो। इन चेहरों के पिछले रिकॉर्ड देखने से भी कुछ पता नहीं चलता। बहुत से लोग योगी आदित्य नाथ को मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में है पर मुझे लगता नहीं कि प्रधानमन्त्री मोदी आदित्यनाथ को ये जिम्मेदारी सौंपेंगे। आदित्यनाथ व्यक्तित्व के भले ही धनी हों, अपने क्षेत्र में भले ही उनका सिक्का चलता हो पर प्रदेश सँभालने के लिए उसकी अर्थव्यवस्था को लाइन पर लाने के लिए एक दूरद्रष्टा की जरुरत है।  देश के विकास के संकेतकों की बेहतर बनाने के का रास्ता उत्तर प्रदेश से गुजरता है जहाँ देश की १६% जनसँख्या रहती है। २० करोड़ से ज्यादा वाले इस प्रदेश में तरक्की का मतलब देश की तरक्की है लेकिन बड़ा सवाल अभी है कि योगी आदित्यनाथ या मनोज सिन्हा या जो भी प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठता है, क्या वो व्यक्ति उत्तर प्रदेश में कुछ त्वरित परिवर्तन ला पायेगा? प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र एकदम  लचर अवस्था में है। अगर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया जाए तो क्या वो इन दो क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में रख पाएंगे? क्या वे पुलिस की गुंडागर्दी और गुंडों की गुंडागर्दी पर लगाम लगा पाएंगे। क्या वो कृषि में जरुरी परिवर्तन ला पाएंगे? क्या वे परिवहन व्यवस्था में जान फूँक पाएंगे? क्या वे भुखमरी पर लगाम लगा पाएंगे? 

छोटी सी जिंदगी है। हँसो, मुस्कुराओ, खुश रहो।

किसी पर चिल्लाने से, गुस्सा करने से कोई काम नहीं बनता है, उल्टे अक्सर काम बिगाड़ जाते हैं, और जिस पर आप चिल्ला रहे होते हैं उसके साथ आपके संबंधों में गाँठ पड़ जाती है। अक्सर मैं देखता हूँ हमारे समाज में लोग सिर्फ इसलिए दूसरों पर गुस्सा उतारते हैं चिल्लाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है वो उम्र में बड़े हैं, बॉस है, अध्यापक हैं, माँ हैं, बाप हैं, बड़े भाई हैं, बड़ी बहन हैं इसलिए चिल्लाने का गुस्सा करने का उनका हक है। नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, आपका कोई हक नहीं बनता है।
हर व्यक्ति स्वतंत्र है। आपका पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, विद्यार्थी, कर्मचारी इत्यादि होने का ये मतलब नहीं कि वो आपका गुलाम है। अगर कोई गलती होती है, कोई काम बिगड़ता है तो जोर जोर से चीखने से, चिल्लाने से कोई काम बन नहीं जायेगा, बल्कि और बिगड़ जायेगा। केवल काम ही नहीं, आपका और आप जिस पर चिल्ला रहे होते हैं, दोनों का दिमाग भी बिगड़ जाता है, चित्त की शांति भंग हो जाती है। उत्पादकता कम हो जाती है।
चिल्लाने से कुछ नहीं सुधरता है, बल्कि जिसने गलती की हैं उसके मन में आपके लिए एक घृणा पैदा होती है, आपके रिश्ते में एक गाँठ पड़ जाती है, और कभी कभी ये गाँठ पूरी जिंदगी पड़ी रहती है। यदि कभी आप चिल्लाते और गुस्सा करते भी हैं तो वो क्षणिक होना चाहिए और आपको दूसरे व्यक्ति से तुरंत क्षमा मांगनी चाहिए ताकि उसे भी पता चले कि आप अपने व्यवहार पर शर्मिंदा हैं।
सबका अपना जिंदगी जीने का तरीका है, सब अपने किये का फल पाएंगे, आपको चिल्लाने और चीखने की कोई जरुरत नहीं है। अगर आप बॉस है आपका का काम बिगड़ता है तो आप बिना कुछ गुस्सा किये कर्मचारी की छुट्टी कर सकते हैं। अगर आप बड़े हैं, तो सिर्फ अपना काम कीजिये, छोटों पर धौंस जमाने और चिल्लाने का आपको कोई हक नहीं। अगर आप अध्यापक हैं तब आपको बिलकुल भी चिल्लाना नहीं चाहिए, संयम से काम लें और जिस बच्चे ने आपके अनुरूप कार्य नहीं किया है या नियम तोड़े हैं उससे आराम से बात करें समझाएं, और फिर भी न माने तो जरूरी कागजी कार्यवाही करें। चिल्लाने और डांटने का कोई हक नहीं है।
आपको सिर्फ इतना हक़ है कि आप अपनी बात संयमित ढंग से प्यार से सामने वाले के सामने रखें, बस। याद रखें, यदि आप ऊँचे पद पर हैं तो अपनी आवाज नीचे रखें और दिमाग में शांत बनाएं रखें, जिन्दगी में बहुत आगे जाएंगे।
छोटी सी जिंदगी है। हँसो, मुस्कुराओ, खुश रहो। क्या मालूम कब ऊपरवाला ऊपर बुला ले।

My Nainital Trip


Naini lake from Tiffin Top

Naini lake from Naina Devi temple

Evening in Nainital

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