छोटी सी जिंदगी है। हँसो, मुस्कुराओ, खुश रहो।

किसी पर चिल्लाने से, गुस्सा करने से कोई काम नहीं बनता है, उल्टे अक्सर काम बिगाड़ जाते हैं, और जिस पर आप चिल्ला रहे होते हैं उसके साथ आपके संबंधों में गाँठ पड़ जाती है। अक्सर मैं देखता हूँ हमारे समाज में लोग सिर्फ इसलिए दूसरों पर गुस्सा उतारते हैं चिल्लाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है वो उम्र में बड़े हैं, बॉस है, अध्यापक हैं, माँ हैं, बाप हैं, बड़े भाई हैं, बड़ी बहन हैं इसलिए चिल्लाने का गुस्सा करने का उनका हक है। नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, आपका कोई हक नहीं बनता है।
हर व्यक्ति स्वतंत्र है। आपका पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, विद्यार्थी, कर्मचारी इत्यादि होने का ये मतलब नहीं कि वो आपका गुलाम है। अगर कोई गलती होती है, कोई काम बिगड़ता है तो जोर जोर से चीखने से, चिल्लाने से कोई काम बन नहीं जायेगा, बल्कि और बिगड़ जायेगा। केवल काम ही नहीं, आपका और आप जिस पर चिल्ला रहे होते हैं, दोनों का दिमाग भी बिगड़ जाता है, चित्त की शांति भंग हो जाती है। उत्पादकता कम हो जाती है।
चिल्लाने से कुछ नहीं सुधरता है, बल्कि जिसने गलती की हैं उसके मन में आपके लिए एक घृणा पैदा होती है, आपके रिश्ते में एक गाँठ पड़ जाती है, और कभी कभी ये गाँठ पूरी जिंदगी पड़ी रहती है। यदि कभी आप चिल्लाते और गुस्सा करते भी हैं तो वो क्षणिक होना चाहिए और आपको दूसरे व्यक्ति से तुरंत क्षमा मांगनी चाहिए ताकि उसे भी पता चले कि आप अपने व्यवहार पर शर्मिंदा हैं।
सबका अपना जिंदगी जीने का तरीका है, सब अपने किये का फल पाएंगे, आपको चिल्लाने और चीखने की कोई जरुरत नहीं है। अगर आप बॉस है आपका का काम बिगड़ता है तो आप बिना कुछ गुस्सा किये कर्मचारी की छुट्टी कर सकते हैं। अगर आप बड़े हैं, तो सिर्फ अपना काम कीजिये, छोटों पर धौंस जमाने और चिल्लाने का आपको कोई हक नहीं। अगर आप अध्यापक हैं तब आपको बिलकुल भी चिल्लाना नहीं चाहिए, संयम से काम लें और जिस बच्चे ने आपके अनुरूप कार्य नहीं किया है या नियम तोड़े हैं उससे आराम से बात करें समझाएं, और फिर भी न माने तो जरूरी कागजी कार्यवाही करें। चिल्लाने और डांटने का कोई हक नहीं है।
आपको सिर्फ इतना हक़ है कि आप अपनी बात संयमित ढंग से प्यार से सामने वाले के सामने रखें, बस। याद रखें, यदि आप ऊँचे पद पर हैं तो अपनी आवाज नीचे रखें और दिमाग में शांत बनाएं रखें, जिन्दगी में बहुत आगे जाएंगे।
छोटी सी जिंदगी है। हँसो, मुस्कुराओ, खुश रहो। क्या मालूम कब ऊपरवाला ऊपर बुला ले।