Islamists in Indian subcontinent

कश्मीरी पंडितों को सेकुलरिज्म के कीड़े ने काटा हुआ था - मुल्लों ने उन्हें कश्मीर से मार भगाया - कश्मीर पर कब्जा कर लिया। केरल में भी हिंदुओं को सेकुलरिज्म के कीड़े ने जबरदस्त काटा हुआ है - मुश्किल से 50-55% बचे हैं। बंगालियों को तो सेकुलरिज्म के कीड़े ने बहुत पहले ही काट लिया था - परिणाम देखिये - मुल्लों ने पहले बांग्लादेश लिया - अब बचा खुचा बंगाल भी छीन रहे हैं। 712 के बाद से अब तक 1300 साल से ज्यादा हो चुके हैं पर हिंदुओं को ये समझ नहीं आया कि अब्राहमिक रिलिजन विस्तारवादी है, उनको अपने रिलिजन के विस्तार के लिए तुम्हारी गर्दन भी काटनी पड़ेगी तो वो काटेंगे। दारुल हर्ब को दारुल इस्लाम बनाना उनका लक्ष्य है। ईसाईयत फैलाना उनका कर्तव्य है - चाहे फिर उन्हें फेक मिरकल्स करने पड़े या फिर चावल और दवाइयों की टोकरी देकर तुम्हारा नाम मैकू से माइकल करना पड़े या फिर झूठ बोलना पड़े। उन्हें मानवता से कोई लेना देना नही है - जीसस और अल्लाह जैसे इमेजिनरी कैरेक्टर्स के नाम लेकर, मानवता का नाम लेकर वो तुम्हे बेवकूफ बनाते है और तुम बनते हो - पहले हमले के 1305 साल बाद भी हिंदुओं (सिखों, जैनियों, बौद्धों) को अक्ल नहीं आयी है। पहले अफ़ग़ानिस्तान खोया, फिर सिंध खोया, पंजाब खोया, बलोचिस्तान खोया, बंगाल खोया। हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर भी मुल्लों के हांथों में जाने वाला था पर पटेल ने बचा लिया। कश्मीर फिर भी हाँथ से फिसल गया, मुल्लों ने कब्जा कर लिया, कश्मीरी पंडितों को मार भगाया, उनकी औरतों को बलात्कार किया, घरों को जला दिया, जमीने हड़प ली, दुकाने लूट ली। फिर भी कश्मीरी पंडितों में खास तौर पढ़े लिखे लोगों में सेकुलरिज्म के कीड़े ने अभी तक जबरदस्त पैठ बना रखी है। आज भी टीवी पर अखबार में कश्मीरी मुल्लों के गुणगान करते नज़र आते हैं। बंगालियों का भी यही हाल है - बहुत से बंगाली अभी भी सेकुलरिज्म के नशे में हैं - मुल्लों का बचाव किये जा रहे हैं - चार दिन बाद इन्हें भी कश्मीरी पंडितों की तरह मार कर जब मुल्ले वहां से भगाएंगे, हो सकता है तब नशा उतरे। हो सकता है तब भी न उतरे, क्योंकि सेकुलरिज्म का कीड़ा हिंदुओं में जिसे एक बार काट लेता फिर वो जिंदगी भर उससे पीड़ित रहता है।