Kashmir, Kashmiriyat, and Rajnath Singh

लोग राजनाथ सिंह पर भड़के हुए हैं कि वो भड़काऊ बयान क्यों नही दे रहे हैं। केवल निंदा ही क्यों किये जा रहे हैं। तो ऐसा है यदि आप उनकी जगह होते तो आप भी यही करते। देश में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की जिम्मेवारी उनके कंधो पर है। वो कोई भी ऐसा बयान नही देना चाहते जिससे मीडिया मुल्लों को और भड़काए और कश्मीर की आग देश अंदरूनी हिस्सो में भड़के। और रही बात आतंकवादियों के खिलाफ़ कार्यवाही की, तो उन्हें मालूम है कि उन्हें क्या और कैसे करना है। अपनी हर स्ट्रेटेजी को मीडिया के जरिये आप तक नही न पहुचायेंगे। फेसबुक और ट्विटर पर कीबोर्ड योद्धाओं के लिए ये कहना तो आसान है कि आतंकवादियों को मार दो फांसी चढ़ा दो, पर क्या ये काम इतना आसान है। मान लो अगर गृहमंत्री बोल भी दे मीडिया में कि हम आतंकवादियों को निस्तेनाबूत कर देंगे, कश्मीरियों को सबक सिखा देंगे, तो क्या ऐसा कहने से कुछ बदल जायेगा, इस्लामिक आतंकवादी डर जायेंगे। फेसबुक और ट्विटर पर हम अपने घर की सुरक्षा में बैठकर कुछ भी बकवास कर सकते हैं। कभी कभी मैं भी करता हूँ। गुस्सा आता है तो मैं भी अनाप शनाप लिखता हूँ। पर हम आप जो सोचते हैं खासतौर कश्मीर के बारे में, उसको कार्यान्वित कर पाना इतना आसान नही है, इसके लिए चाचा नेहरू को धन्यवाद करना चाहिए। राजनाथ सिंह को मालूम है कि उन्हें एक गृहमंत्री के तौर पर किस प्रकार की संयमित भाषा इस्तेमाल करनी चाहिए। बड़े बोल बहुत सी बातों को बिगाड़ देते हैं। इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ काम जमीन पर दिखना चाहिए, ट्विटर और फेसबुक पर नही। ठीक वैसे ही जैसे मिशनरीज़ का काम जमीन पर दिखता है फेसबुक ट्विटर पर नही। गृहमंत्री का काम लोगों को भड़काना नही है, शांति और सौहार्द्र बनाये रखना है। सेना अपना काम करेगी। बड़े बोल बोलकर कर कुछ हासिल नही होता है।